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धर्म और जाति के आधार पर राजनीति।

देश प्रदेश।

देश में राजनीतिक दल जात-पात का विरोध करते रहते हैं, जातिवाद को समाप्त करने की बातें भी करते रहते हैं परन्तु धर्म और जाति के नाम पर वोट की राजनीति भी करते हैं।

निजी स्वार्थों के चलते राजनीतिक दल मुद्दों पर बात भी करने को तैयार नहीं होते हैं। देश में धर्म और जाति के आधार पर वोट माँगना सभी  राजनीतिक दलों की आवश्यकता बन गया है। हालांकि सभी राजनीतिक दल विकास की बातें करते हैं लेकिन जब वोट माँगते हैं तो जाति और धर्म के आधार पर।

यह भी बड़े आश्चर्य की बात है कि सभी राजनीतिक पार्टियां धर्म और जाति की राजनीति को बुरा बताते हैं और अपने विपक्षी दलों पर जाति और धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते हैं लेकिन खुद जाति और धर्म के नाम पर सामाजिक तानेबाने का जुगाड़ बिठाते रहते हैं ।

देश में चुनाव धर्म एवं जाति के आधार पर होना कब बंद होंगे? क्योंकि राजनीति एक सड़ांध बनती जा रही है। यहां हर राजनीतिक दल को दूसरों की करतूतें कली दिखाई देती है। कोई भी अपने आत्म अवलोकन पर ध्यान नहीं देता है।

Vikram
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