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कासगंज घटना हिन्दू हारा या मुस्लिम।

विशेष रिपोर्ट:-

गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कासगंज  जैसी घटना भारतीय समाज पर धब्बा है।तमाम चैनल और अखबारों में लगातार कासगंज जैसी घटना का प्रदर्शन भारतीय समाज के लिए आइना है।

तत्काल राजनैतिक रोटियां सेंकते हुए इंसानियत को मरने दिया गया। अफवाहों का जमकर भुनाया जाना , तकनीक का दुरुपयोग कैसे किया गया यह जाहिर करता है

कौन मरा , कौन घायल हुआ , किसने घायल किया , किसने मारा हिन्दू कौन था , मुस्लिम कौन था ऐसे तमाम सवाल इंसानियत को हर पल मारते रहे हैं ।

दल कहते हैं हम तुम्हारे लिए लड़ेंगे , तुम्हारे  अधिकारों के लिए लड़ेंगे । तुम कभी नहीं कहते इंसानियत के लिए कब बोलोगे ।हिन्दू के लिए प्रवचन , मुस्लिम के लिए प्रवचन क्या बताते हो ।क्यों भूलते हो कि हम पहले इंसान है कोई धर्म कोई जाती हमें इंसान होने से कभी नहीं रोक सकती है।

किन्तु विवादों की जड़ ढूंढ़कर एकता स्थपित करना इंसान भी भुला रहा है। व्यावसायिक रंग में रंगे मीडिया के तमाम व्यापारियों की निगाह कवरेज पर होती है, टीआरपी पर होती हैं,दर्शकों पर होती है। इंसानियत मरती है तो मुद्दा मिल जाता है खबर बन जाती है । देश का हिस्सा है हम, मत बटने दो , मत टूटने दो , हमें एक रहने दो।

ना हिन्दू मरेगा , ना मुसलमान , ना हिन्दू हारेगा ना मुसलमान , जब भी कोई हारेगा या मरेगा तो सिर्फ इंसान।

इंसानियत को जिंदा रहने दो मत बाटो घटनाओं के आधार पर।मत बाटों धर्म के आधार पर।अपनी खबरों में धर्म नहीं इंसानियत दिखाओ , हमारे मुद्दों पर राजनैतिक रोटियां मत सेकों।हमें मत बाटों हमें एक रहने दो।

 

Vikram
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