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हां मै जिंदा रहूंगा जब तक तुम चलती रहोगी।

Vikram Singh Rajput

आज जब तुमसे विवाह की वर्ष गांठ मैंने मनाई , तब जाकर विवाह की सार्थकता नजर आई।तुम वास्तविकता में मेरी अर्धांगिनी हो, मेरी खामोशी को शब्द देकर तुमने मेरा होना सार्थक कर दिया ।

ए मेरी कलम तुमने जाने कितने शब्दों को बुना है।हर बार मैंने सुख दुख में तुमको ही तो चुना है।हां मै जिंदा रहूंगा जब तक तुम चलती रहोगी।सांसे रुकने से  विक्रम की मौत नहीं होगी , ए मेरी कलम तुम खामोश नहीं होगी।

कितने अब तक बदल गए है कलम मेरी बताएगी।जनता के सारे दर्दों के हाल तुम्हे सुनाएगी।किसने किसके घर फूंके है सबकुछ तुम्हे बताएगी।दंगे है या हथकंडे है सच सामने लाएगी।मौतों पर ना मौन रहेगी , जो है सब कुछ सच ही कहेगी। 

 

Vikram
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