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काला सच स्कूल जाकर क्या सीख रहे हैं बच्चे जानना जरूरी।

नरसिंहपुर।

आखिर बच्चे स्कूल जाकर क्या सीख रहे हैं माता पिता को यह जानकारी अवश्य होना चाहिए।

हमने स्कूल जाकर देखा तो बैक साइड या कहें स्कूल के पीछे की ओर की दीवालों पर टॉयलेट में अनेक गन्दी बातें लिखी पाई गई। कक्षा छठवीं से दसवीं तक के बच्चों के बारे में जब हमने जानना चाहा तो पाया कि जितना हम सोचते हैं उससे ज्यादा बच्चे स्कूल में आश्लिल भाषा का इस्तेमाल करते है कक्षा में पढ़ रही छात्राओं के साथ या उनके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता ऐसी बातें या आकृति उकेरते हैं ।

सिगरेट का धुआं , शराब और बीयर  का सेवन करना गुटखा खाना आधुनिकता की अंधी दौड़ में एक स्टेटस सिंबल बना दिया गया है।

गर्ल फ्रेंड बनाना शौक बन गया है ।बारह से सोलह वर्ष की आयु वर्ग के यह बच्चे ऐसी बातें करते हैं कि एक बार तो आपका भी दिमाग चकरा जाए कि आखिर यह बच्चे स्कूल जाकर क्या सीख रहे हैं।

समस्या जितनी तेजी से बढ़ रही है वहीं इसका समाधान खोजना होगा बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें उनके दोस्तों की जानकारी माता पिता को अवश्य होना चाहिए,एवम् जागरूकता लाने के लिए उन्हें समय समय पर दोस्त बनकर उचित सलाह दें।

Vikram
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