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मेरी कलम से बिखरे मोती।

बिखरे मोती।

✍✍।। विक्रम। ।✍✍

अक्सर खामोश  रहता हूं
कुछ कहना चाहता हूं ।।

सत्ता के गलियारे में सिसकियों को सुनता हूं।     उठता है जब दर्द तो कलम को ही चुनता हूं।।

अक्सर खामोश  रहता हूं
कुछ कहना चाहता हूं ।।

मुस्कुराना चाहता  हूं
कुछ  दर्द छिपाता हूं !!

नजरें उदास-उदास मेरी हैं?
कहीं यादों की धूल जमी है  !!

अक्सर खामोश  रहता हूं
कुछ कहना चाहता हूं ।।

समझता हूं जज्बात तुम्हारे,
कलम के मोती बिखर गए सारे।

 

अक्सर खामोश  रहता हूं
कुछ कहना चाहता हूं ।।

हां कलमकार हूं लिखता जाता हूं।                       तुम्हारे हर ख्वाब को स्याही से।।

अक्सर खामोश  रहता हूं
कुछ कहना चाहता हूं ।।

विकास की वाहवाही से दूर सच और भी है।
नजर उठाकर देखो आम जनता के दर्द और भी है।
।। विक्रम ।।
Newslive88

 

Vikram
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