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मिलावटखोरी का काला बाजार फलता फूलता नियमो कि धज्जियां उड़ाई जा रही है।

नरसिंहपुर।

खाद्य पदार्थ में मिलावट करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और यदि अपराध सिद्ध हो जाता है तो भारतीय दंड संविधान की धारा २७२ के तहत अपराधी को आजीवन कारावास का प्रावधान है, व  खाद्य सुरक्षा एवं मानक २००६ के तहत अदालत में मुकद्दमा चलता है और आजीवन कारावास या जुर्माना लगाया जा सकता है।सुरक्षित भोजन के संबंध में भारत में मुख्य कानून है -१९५४ का खाद्य पदार्थ अपमिश्रण निषेध अधिनियम।इसका नियम लगभग पैसंठ खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों या मिलावट का नियमन करता है।

सन १९५४ में खाद्य अपमिश्रण अधिनियम सम्पूर्ण देश में लागू किया गया एवम् सन १९५५ में इस अधिनियम के अंतर्गत आवश्यक नियम बनाकर लागू किए गए।

इस कानून के अंतर्गत झूठे नाम से खाद्य पदार्थ बेचना तथा अपद्रविकरण दंडनीय अपराध है।

यदि खाद्य पदार्थ को दूषित जगह  बनाया  रखा जाता है जिससे वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है,यदि वह पदार्थ रुग्ण पशु से प्राप्त है,यदि उस पदार्थ की शुद्धता विहित मान से कम है,यदि किसी विक्रेता द्वारा बेचा गया खाद्य पदार्थ उत्तम क्वालिटी या तत्व का नहीं है जैसा  क्रेता द्वारा मांगा गया है और जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है,दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

आज के दौर में लगभग तीस से चालीस प्रतिशत वस्तुओं में मिलावट की संभावना रहती है दूध में मिलावट, लाल मिर्च,कली मिर्च, घी,शक्कर, इत्यादि।

Vikram
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