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जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में दवा गैंग का काला कारोबार।

नरसिंहपुर।
जिले के एक मात्र शासकीय चिकित्सालय के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से विमुख हो इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली अपनी आदतों से बाज़ नहीं आ रहे हैं।चिकित्सालय के कर्मियों द्वारा मरीज के परिजनों से ही स्ट्रेचर और व्हील चेयर पर मरीज को ले जाने के लिए मजबुर किया जाता है चाहे फिर परिजन स्वयं ही बीमार हो या वृद्ध,और तो और बच्चों और महिलाओं को भी स्ट्रेचर और व्हील चेयर स्वयं ले जाना पड़ता है।जबकि कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद रहकर दहला पकड़ (ताश का खेल)खेलने में व्यस्त रहते हैं।भोजन वितरण के समय अभद्र व्यवहार और टिप्पणी, महिलाओं के सामने अनुचित वार्तालाप ,परिजनों को धमकाना यह सब तो आम बात हो चुका है।
सबसे गंभीर बात तो यह है कि गरीब मरीजों को आधी रात में दवा बाहर से लाने के लिए मजबुर किया जाता है,और इसके लिए बाकायदा एक नेटवर्क बनाकर काम किया जाता है, इस मिलीभगत में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी शामिल रहते हैं, रात्रि ड्यूटी के दौरान दवा वितरण करने वाले कर्मचारी अपनी सीट पर ही नहीं मिलते मजबूरी में घबराए हुए परिजनयू आधी रात को दवा के अभाव में यहां वहां भटकते रहते हैं।पर जहा डॉक्टर का कमिशन तय होता है दवा डॉक्टर के द्वारा बताए गए मेडिकल से ही खरीदनी पड़ती है।और जो मरीज दवा बाहर से नहीं खरीद सकते हैं उन्हें चलता कर दिया जाता है।यहां तक कि मरीज की स्थिति का भी ध्यान नहीं रखा जाता है। मामला हाई प्रोफ़ाइल लोगों से जुड़ा होने के कारण शिकायत करने वाले को ही धमकाया जाना आम बात है।यही वजह है कि गरीब मरीजों का इलाज के नाम पर शोषण किया जाता है और तनख्वाह के अलावा प्रतिदिन कमिशन की रकम का बंदरबाट कर्मचारियों द्वारा किया जाता है।

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