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चौरागड़ किले का रहस्य।

चौरागड़।

सातपुडा पर्वत की ऊंची चोटी पर स्थित है चौरागड़ का किला ।किले का परकोटा एवम् तीन दरवाजों के अवशेष अब भी विद्यमान हैं।किले के भीतर स्थित रानीताल में ध्वस्त स्थान पर कैदियों को रखा जाता था।पिरामिड नुमा मंदिर में स्थापित भगवान नृसिंह की प्रतिमा कलचुर कालीन प्रतीत होती है। गौंड शासकों के अवसान के बाद ई १८१८ में अंग्रेजों ने इस किले को ध्वस्त कर दिया था।

सातपुडा पर्वत श्रेणी की दुर्गम चोटी पर  स्थापित चौरागड़ कििले मार्ग कठिनाइयों भरा है,पेयजल की उचित व्यवस्था  नहीं है रेवा कुंड में  शैवााल पुरी तरह से  फ़ैल गई है जिससे पानी पीने योोग्य नहीं दिखाई देता है ,बीहड़ मार्ग में जंगली जानवरों के सामने आ  जाने का भय भी बना रहता है।

ग्रामीणों के अनुसार किले में रात के समय ठहरना खतरों से खाली नहीं है क्योंकि अनेक कैदियों की प्रेत आत्मा भटकती रहती है रात्रि विश्राम की स्थिति पर आने पर भय ग्रस्त आगंतुक पहाड़ की तलहटी में बसे गांव में रुककर विश्राम करते हैं।

ग्रामीण मान्यता के अनुसार रेवाकुंड नामक तालाब में पारस पत्थर है अनेक लोगों द्वारा पारस पत्थर खोजने की कोशिश की गई है।

राह में ग्रामीणों का आगंतुकों के प्रति व्यवहार भी सहयोग पूर्ण  है।वाहन किले के द्वार से लगभग  तीन किलोमीटर दूर छोड़ कर पैदल किले तक पहुंचना होता है। चारों तरफ वियावन जंगल और पहाड़ की ऊंची  चोटी को देखने पर आश्चर्य होता है कि भला किस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा  विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जन जन में आजादी की अलख जगाने एवम् समाज को अंग्रेजी दासता से मुक्त कराने के लिए प्रयासरत रहे।

Vikram
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