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कानून का खौफ नहीं होने से शिक्षक कर रहे गुंडागर्दी।

नरसिंहपुर।

एजुकेशन एक्ट की धारा १७ के अनुसार विद्यालय में बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करने पर शिक्षक के विरुद्ध सजा का प्रावधान है।पैरेंट्स आईपीसी की धारा ३२३,३२४एवम्३२५ के अनुसार शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है एवम् धारा ३२५ के अनुसार सात साल की सजा का प्रावधान है।

शिक्षक द्वारा बच्चों के साथ मारपीट करने, मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने पर शिकायत की जाती है तो शिक्षक के विरुद्ध दोष सिद्ध हो जाने पर सजा का प्रावधान है।

परन्तु बच्चों के भविष्य की चिन्ता करते हुए माता पिता द्वारा अक्सर शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती है जिससे शिक्षकों के हौसले और भी बुलंद हो जाते हैं बच्चों को डरा धमकाकर उनसे बर्तन धुलवाना,झाड़ू लगाने के लिए दबाव बनाना,क्रोध में आकर मारपीट करना शिक्षक द्वारा घर के काम भी बच्चों से करवाना आम बात हो गई है यही नहीं अनेक जगहों पर शिक्षक द्वारा बच्चों के शारीरिक शोषण की घटनाएं भी सामने आ चुकी है परन्तु कड़ी कार्रवाई नहीं होने से शिक्षकों में कानून व्यवस्था का भय नहीं दिखाई देता है।विद्यालय से घर आने तक माता पिता बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित रहते हैं खासकर बच्चियों के माता पिता अक्सर अपनी बच्चियों की सुरक्षा के प्रति संशय में रहते हैं परन्तु विभागीय अधिकारियों के लापरवाही बरतने के कारण शिक्षकों पर अनेक बार कड़ी कार्रवाई नहीं की जा सकती है

Vikram
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